प्राकृतिक चिकित्सा

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इन तीन बातों की अत्यधिक आवश्यकता होती है – स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन तथा सम्मानित जीवन। सुख का आधार स्वास्थ्य है तथा सुखी जीवन ही सम्मान के योग्य है।

आयुर्वेद का अनुपम उपहार

अच्युताय हरिओम उत्पाद

स्वास्थ्य का सच्चा मार्ग

स्वास्थ्य का मूल आधार संयम है।

सर्दियों के लिए विशेष

अच्युताय हरिओम उत्पाद

Achyutaya HariOm Panchamrit Ras :अच्युताय हरिओम पंचामृत रस : स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग

Achyutaya HariOm Santkripa Surma : अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा - आँखों को सुरक्षित, निरोगी, तेजस्वी बनाने की क्षमता रखने वाला अदभुत योग

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Thursday, 15 August 2013

नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी

नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी


बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।



भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।



विशेष :-
- हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह विधि नहीं अपनानी चाहिए।


-
यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी  को ठण्ड न लगे।


-
अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।


-
इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।
सादा बुखार

 सादे बुखार में उपवास अत्यधिक लाभदायक है। उपवास के बाद पहले थोड़े दिन मूँग लें फिर सामान्य खुराक शुरु करें। ऋषि चरक ने लिखा है कि बुखार में दूध पीना सर्प के विष के समान है अतः दूध का सेवन न करें।

पहला प्रयोगः सोंठ, तुलसी, गुड़ एवं काली मिर्च का 50 मि.ली काढ़ा बनाकर उसमें आधा या 1 नींबू निचोड़कर पीने से सादा बुखार मिटता है।

दूसरा प्रयोगः शरीर में हल्का बुखार रहने पर, थर्मामीटर द्वारा बुखार न बताने पर थकान, अरुचि एवं आलस रहने पर संशमनी की दो-दो गोली सुबह और रात्रि में लें। 7-8 कड़वे नीम के पत्ते तथा 10-12 तुलसी के पत्ते खाने से अथवा पुदीना एवं तुलसी के पत्तों के एक तोला रस में 3 ग्राम शक्कर डालकर पीने से हल्के बुखार में खूब लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः कटुकी, चिरायता एवं इन्द्रजौ प्रत्येक की 2 से 5 ग्राम को 100 से 400 मि.ली. पानी में उबालकर 10 से 50 मि.ली. कर दें। यह काढ़ा बुखार की रामबाण दवा है।

चौथा प्रयोगः बुखार में करेले की सब्जी लाभकारी है।

पाँचवाँ प्रयोगः मौठ या मौठ की दाल का सूप बनाकर पीने से बुखार मिटता है। उस सूप में हरी धनिया तथा मिश्री डालने से मुँह अथवा मल द्वारा निकलता खून बन्द हो जाता है।

Thursday, 7 March 2013

अच्युताय सितोपलादि चूर्ण(Achyutaya Sitopladi Churna)




अच्युताय सितोपलादि चूर्ण(Achyutaya Sitopladi Churna)

 

उपयोग : यह चूर्ण क्षय, खाँसी, जीर्णज्वर,
धातुगतज्वर, मंदाग्नि, अरुचि, प्रमेय, छाती
में जलन, पित्त विकार, खाँसी में कफ के
साथ खून आना,बालको की निर्बलता,
रात्री में ज्वर आना, नेत्र में उष्णता तथा
गले में जलन आदि विकारों को दूर करता
है सगर्भा स्त्रियों को ३-४ मास तक सेवन
करने से गर्भ पुष्ट और तेजस्वी बनता है
मात्रा : २ से ४ ग्राम दिन में २ बार शहद
      के साथ ले  
   
(1)Product Name :-  Sitopladi Churna
(2)Quantity :- 50 g.
(3)Direction For Use :- 2 to 4 g. powder once or twice a  day on empty stomach with honey ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
 (4)Benefits :- It acts as a mucolytic expectorant thereby useful in productive cough, dry cough, rhinorrhoea, sinusitis, asthma, bronchitis, haemoptysis, T.B.(kshay),
          It increases apetite thereby useful in long standing low grade fever, anorexia etc.
(5)Main Ingredients :- Bambusa arundinaceae(Pure vanslochan), Piper longum(pipar), Cinnamomum zeylanicum(dalchini) etc. 









Friday, 1 March 2013

अच्युताय डायबिटीज टेबलेट(Achyutaya Diabetes Tablet)





अच्युताय डायबिटीज टेबलेट(Achyutaya Diabetes Tablet)



 (मधुमेह नाशिनी डायाबिटीज के लिए अक्सीर इलाज )
       
लाभ :यकृत एव् प्लीहा के बिकार
पाण्डु,कृमि व् कफ का नाश करने
वाली,रक्तशोधक,शोथहर,ज्वरनाशक,
पित्तशामक मलावरोध को दूर करनेवाली,
अरुचि,मंदाग्नि व् आंत्रविकार को हरनेवाली,
आमाशय के रोग तथा कैंसर को मिटानेवाली,
व कुष्ठादि रोगों में लाभदायी है
सेवन विधि :- दो से तिन गोली खाली पेट दिन में
तिन बार पानी से ले लेने के पहले व बाद में
एक घंटे तक दूध न ले 

(1)Product Name :- Diabetes Tablet
(2)Quantity :- 60 gm.

(3)Direction For Use :- 2 to 3 tab. once or twice a day ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
        Note :- Do not take milk 2 hr. before & 2 hr. after medicine.
(4)Benefits :-   Very useful for 20 types of prameha i.e. diabetes mellits, diabetes incipidus,albuminuria,proteinuria,
phosphaturia etc.
            This tablet specially useful in maintaining normal serum, cholesterol & triglyceride levels & has antibiotic action.
                 Also useful in worm infestation,anaemia with edema, liver & splenic disorders, obstructive jaundice, constipation, fatty liver, hepatosplenomegaly due to various diseases, ascitis, cancer, triple vessel disease(heart attack).
(5)Main Ingredients :- concentrated cow urine (gaujaran ghan), ocimum sanctum (Tulsi), Azadirachta indica(Neem) etc.






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