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Wednesday, 24 July 2013
वीर्य वर्धक प्रयोग
वीर्य वर्धक प्रयोग
1)
शुद्ध कोंच के बीज, विदारीकन्द, गोखरू, शतावरी, अश्वगंधाम प्रत्येक १००-१०० ग्राम, जायफल, छोटी इलायची, पिप्पली प्रत्येक २० ग्राम तथा शुद्ध
बंगभस्म १२० ग्राम-इन सभीको अलग-अलग पीसकर अच्छी तरह मिला के काँच की बरनी में रख
लें | सुबह
३ ग्राम मिश्रण ८-१० बूंद बड़ का दूध मिला के दूध के साथ सेवन करें |
2)
शुद्ध बंगभस्म १ रत्ती (१२० मी. ग्रा. %) सुबह घी के साथ लें और ऊपर से दूध पी लें
| यह
प्रयोग ४०-६० दिनों तक करने व ब्रह्मचर्य का पालन करने से शुक्राणुओं की वृद्धि
होगी | इससे
नपुंसकता में भी लाभ होता है |
3)कौंच
:कौंच के बीज और गोखरू के चूर्ण को मिश्री के साथ मिलाकर दूध के साथ पीने से
शारीरिक शक्ति बढ़ती है।
4)असगंध
:असगंध के चूर्ण को दूध में मिलाकर पीने से शरीर शक्तिशाली बनता है और आदमी का
वीर्य पुष्ट होता है।
5)मूसली
:काली मूसली के चूर्ण में मिश्री को मिलाकर खाने से शरीर की शक्ति बढ़ती है।
6)शतावर:
शतावरी को पकाकर खाने या शतावरी के चूर्ण की खीर बनाकर सेवन करने से शरीर की ताकत
में वृद्धि होती है।
Semen –promoting mixture:
(1) Take pure kaunch (Mucuna pruriens) seeds, Vidarikand (Ipomoea
Paniculata), Gokharu (Tribulus Terrestris), Shatawari (Asparagus
racemosus), Ashwagandha (Withania somnifera) 100 grams each; Jaiphal (Myristica
fragrans), small cardamom, Pippali (Piper longum) 20 grams each and
pure Vanga-bhasma (oxide of tin compounds) 120 grams. Grind them separately and
then mix them well. Store the mixture in a glass jar. Take 3 grams of the
mixture in the morning mixed with 8-10 drops if the milky juice of banyan milk
with milk.
(2)Take pure Vang-bhasma 120 mg in the morning with ghee. Then drink
milk. Doing this for 40 to 60 days while observing Brahamcharya will increase
sperm count of the semen. It helps in impotency as well.
Friday, 12 July 2013
वजन बढ़ाने के लिये खाएं ये 13 फूड
वजन बढ़ाने के लिये खाएं ये 13 फूड
अधूरा
भोजन, लंबे समय तक भोजन के समय में अंतराल, कम भोजन का सेवन करना और उससे ज्यादा मेहनत
करना, वजन कम होने के कारणों में से एक है।
अन्य कारण है लम्बी बीमारी,
टीबी, कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और एनोरेक्सिया
नर्वोसा जैसी बीमारियों के कारण हो हो सकता है। वजन में बराबर और धीमी वृद्धि की
हमेशा सलाह दी जाती है। हमें अपना वजन अपनी उम्र, लिंग और ऊंचाई के अनुसार बनाये रखना चाहिए। अगर आपका भी वजन कम है और
दूसरों के सामने हंसी का कारण बनते हैं तो, निराश
होने की बजाए कुछ ऐसे खाघ पदार्थों का सेवन करें, जिससे आपके वजन में वृद्धी हो। हम कुछ उच्च कैलोरी प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और स्वस्थ फैट वाले
भोजन जानते है जो कि आप को वजन बढ़ाने में मदद करेगा। बाजारों में मिलने वाले वजन
बढाने के पदार्थों से जितना हो सके बच कर रहें और हमारे बताए गए खाघ पदार्थों का
सेवन नियमित रूप से करें।
1. बादाम : यह बादाम, तंत्रिकाओ के विकास के लिए आवश्यक भोजन
हैं, लेकिन यह वजन बढ़ाने के लिए अच्छे
विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। आप हर रोज बादाम खाए तो शारीरिक
कार्यों और तंत्रिकाओ की स्थिरता में सहायता करेगा।
2. नारियल का दूध : यह आहार तेलों का
समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है।
नारियल के दूध में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी। जिससे आपके वजन में वृधि
होगी।
3. मलाई : मिल्क क्रीम में आवश्यकता से
ज्यादा फैटी एसिड होता है। और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी
की मात्रा होती है। मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से वजन तेजी से
बढ़ेगा।
4. अखरोट : अखरोट में आवश्यक
मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है।
रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से
प्राप्त होगा।
5. केला : तुरंत वजन बढाना हो तो केला
खाइये। रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा।
6. काजू : काजू स्वस्थ काया पाने का आसान
तरीका है। काजू के तेल में न केवल वजन बढ़ाने बल्कि काजू रोज़ खाने से आपकी त्वचा
कोमल और बाल चमकदार दिखने लगेने।
7. ब्राउन राइस : ब्राउन राइस
कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है। भूरे रंग के चावल
कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल
होगा।
8. आलू : आलू कार्बोहाइड्रेट और
काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है। ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा
बढ़ जाती है।
10. बीन्स : जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज
नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है। बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है। यह सिर्फ वजन बढ़ने
में ही मदत नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है।
11. जैतून का तेल : जैतून के तेल में आवश्यक
कैलोरी बहुत बड़ी मात्रा में पाई जाती है। और यह हृदय रोग से लड़ने में भी बहुत
मदद करता है।
12. मक्खन : मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी
पाई जाती है। मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में
भी मदद करता है।
13. किशमिश : किशमिश में अनाज की 99 % कैलोरी पायी जाती है और फाइबर भी बहुत
अच्छी मात्रा में पाया जाता है। ये शरीर के फैट को हटा के स्वस्थ कैलोरी में
परिवर्तित करता है।
Monday, 10 June 2013
अच्युताय बल्य रसायन (Achyutaya Balya Rasayana)
अच्युताय बल्य रसायन (Achyutaya Balya Rasayana)
यह चूर्ण उत्तम बलप्रद, पौष्टिक, रसायन, कांति-वर्धक एवं उत्कृष्ट वीर्यवर्धक है |
इसके नियमित सेवन से शरीर की सभी धातुओं का पोषण होकर शरीर सुदृढ़ बनता है एवं शरीर स्वस्थ व तंदुरस्त रहता है | यह मांस-पेशी, अस्थियाँ एवं स्नायुओं की दुर्बलता दूर करके उनका बल बढाता है | कृश एवं दुर्बल रोगियों का वजन एवं बल बढाकर शरीर को मजबूत बनाता है |
यह बुद्धिशक्ति एवं स्मृतिशक्ति बढाकर मानसिक क्षमता को बढाता है | मन में उत्साह, स्फूर्ति, आत्मविश्वास आदि गुणों का विकास करके विभिन्न प्रकार के मानसिक रोगों से रक्षा करता है |
यह शारीरिक-मानसिक दुर्बलता, स्वप्नदोष, पेशाब के साथ धातु जाना, वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन, शुक्राणु की कमी, समय पूर्व की वृद्धावस्था, खून की कमी एवं कमर दर्द आदि रोगों में भी लाभदायी है | यह शुक्राणुओं की वृद्धि करता है, अत: जिन पुरुषों में शुक्राणु की कमी (Oligospermia) के कारण संतान न होती हो उनके लिए भी अत्याधिक लाभप्रद है |
यह रोगप्रतिकारक शक्ति बढाकर विभिन्न प्रकार के शारीरिक-मानसिक रोग एवं ऋतुपरिवर्तन जन्य रोगों से रक्षा करता है |
सेवनविधि – 1 ग्लास दूध में 1 चम्मच शुद्ध घी तथा 5 ग्राम (1 चम्मच) बल्य रसायन चूर्ण मिलाकर रात को सोते समय (भोजन के डेढ़-दो घंटे बाद) लें |
Tuesday, 4 June 2013
Sunday, 2 June 2013
अच्युताय आँवला रस(Achyutaya Amla Rus)
June 02, 2013
1.AP, पौष्टिक (nutritious), बलप्रद, वीर्यवर्धक, शीतल(Cold), स्वप्नदोष(night fall)
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गर्मीनाशक,वीर्यवर्धक,पाचक।अमृत फल आँवला रोगी और निरोगी सभी मनुष्यों के लिए उत्तम रसायन है ।इसका रस पौष्टिक,केशवर्धक,रक्तशुद्धि करने वाला रूचिकर,मूत्रल,त्रिदोषनाशक,टूटी हड्डियों को जोडने मे सहायक ,कांतिवर्धक,नेत्रज्योतिवर्धक,दाँतो को मजबूती देने वाला, सप्तधातुओं को पुष्ट करने वाला ,बवासीर ,अजीर्ण, क्षय आदि रोगों मे लाभदायक है ।यह बालों की जडे मजबूत बनाता है ।इसके सेवन से बाल काले होते है ,पाचनतँत्र मजबूत होता है,दीर्घायु और यौवन प्राप्त होता है ।
आँवला चाहे हरा हो या सूखा, जो भी इसका नियमित सेवन करेगा, उसकी जीवनशक्ति में प्रचंड वृद्धि होगी, वह निरोग रहेगा।
आँवला मस्तिष्क को तेज, श्वासरोगों को दूर, हृदय को मजबूत और नेत्रज्योति व आँतों की कार्यशक्ति में वृद्धि तो करता ही है, साथ ही यकृत को स्वस्थ बनाकर पाचनशक्ति में वृद्धि भी करता है। यह रक्तशुद्धि एवं रक्तसंचार में गुणकारी है तथा वीर्य का स्रोत है। यह आयुवर्धक तथा सात्विक वृत्ति उत्पन्न करके ओज एवं कांति कोबढ़ाने वाला है।
आँवले को विटामिन 'सी' का भंडार कहा जाता है। स्वस्थ रहने के लिए हमें रोज जितनी मात्रा में विटामिन 'सी' की आवश्यकता होती है, वह केवल एक आँवला ही पूरा कर सकता है।
विटामिन 'सी' शरीर के लगभग 300 कार्यों में अत्यधिक सहायक होता है। मस्तिष्क के कार्यों में विटामिन 'सी' की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए साधकों को नियमित रूप से आँवले का सेवन करना चाहिए।
संतरे की तुलना में आँवले में 20 गुना ज्यादा विटामिन 'सी' पाया जाता है। 100 ग्राम आँवले में 600 मिलीग्राम विटामिन 'सी' होता है, जबकि 100 ग्राम संतरे में 30 मि.ग्रा. ही विटामिन 'सी'होता है और सेवफल की तुलना में आँवले में 160 गुना विटामिन 'सी' तथा 3 गुना प्रोटीन होता है। आश्चर्य की बात यह है कि आँवले को उबालने, पीसने, भाप में पकाने या सुखाने पर भी उसमें उपस्थित विटामिन 'सी' की मात्रा में कमी नहीं आती है। यह गुण किसी भी अन्य फल या साग-सब्जी में नहीं होता।
मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से महिलाओं में आने वाली कमजोरी आँवले के सेवन से कम होती है।
रोज लगभग 20 से 30 ग्राम आँवले का मुरब्बा या चूर्ण खाने से भरपूर विटामिन 'सी' मिलता है, साथ ही पेट भी साफ रहता है। हृदय रोग में आँवले का मुरब्बा लाभकारी है। मधुमेह के रोगियों को ठंडी के मौसम में ताजे आँवले चबाकर खाने से या उसके रसपान से लाभ होता है। ठंडी के मौसम में 3-4 महीने तक रोज 2-3 ताजे आँवले का रस सुबह खाली पेट पीने से शरीर की सुस्ती व कमजोरी दूर होती है। बुखार में आँवले के रस का सेवन करने से मरीज को कमजोरीनहीं आती।
सुबह खाली पेट आँवले का सेवन करने से अधिक लाभ होता है। इससे हल्का बुखार, प्यास, जलन मिटती है। दाल-सब्जी पकाते समय उसमें आँवला डालकर उबालने से भी उसकी पौष्टिकता में वृद्धि होती है। कैंसर तथा टी.बी. जैसी खतरनाक व्याधियाँ भी आँवले के उपयोग से रोकी जा सकती हैं। स्नान करते समय आँवलों के चूर्ण का गाढ़ा घोल या उनका ताजा रस लगाकर स्नान करने से शरीर में निखार आता है और बाल रेशम जैसे मुलायम हो जाते हैं।
''जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगास्नान का फल मिलता है।'' (पद्म पुराण, उत्तर खण्ड)
भोजन के पहले 1-2 हरे आँवले खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है। भोजन के बीच-बीच में हरे आँवले के टुकड़े चबाकर खाने से पाचनक्रिया में सहायता मिलती है। भोजन के बाद आँवले खाने से अम्लपित्त के कारण पेट तथा गले में होने वाली जलन शांत होती है।
सावधानीः प्रसूता स्त्रियों को आँवले नहीं खाने चाहिए। अतिशय ठंडे वातावरण में शीत और नाजुकप्रकृतिवाले व्यक्तियों को कच्चे आँवले या उनके रस का उपयोग नहीं करना चाहिए। आँवले अत्यन्त शीतल होते हैं अतः सर्दी, खाँसी, कृमि, गठिया, बुखार, मंदाग्नि आदि आम, कफ व शीत प्रधान व्याधियों में मिश्री मिली हुई आँवले की सामग्रियों का त्याग करें। ऐसे व्यक्तियों को आँवले को गर्म करके या उष्ण-तीक्ष्ण द्रव्यों के साथ (जैसे चटनी बना के) उपयोग करना चाहिए।
औषधीय प्रयोग जो मनुष्य आँवले का रस 10 से 15 मि.ली. शहद 10 से 15 ग्राम, मिश्री 10 से 15 ग्राम और घी 20 ग्राम मिलाकर चाटता है तथा पथ्य भोजन करता है, उससे वृद्धावस्था दूर रहती है।
हर्र, बहेड़ा, आँवला, घी-मिश्री संग खाय।
हाथी दाबै बगल में, तीन कोस ले जाय।।
हर्र, बहेड़ा, आँवला, जो शहद में खाय।
काँख चाप गजराज को, पाँच कोस ले जाय।।
हर्र, बहेड़ा, आँवला, चौथी डाल गिलोय।
पंचम जीरा डाल के, निर्मल काया होय।।
इस प्रयोग से शरीर में गर्मी, रक्त, चमड़ी तथा अम्लपित्त के रोग दूर होते हैं और शक्ति मिलती है।
आँवला घृतकुमारी के संग पीने से पित्त का नाश होता है।
15-20 मि.ली. आँवलों का रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से आँखों की रोशनी वृद्धि होती है।
सर्दी या कफ की तकलीफ हो तो आँवले के 15-20 मि.ली. रस या 1 ग्राम (पाव चम्मच) चूर्ण में 1 ग्राम हल्दी मिलाकर लें।
1-2 आँवले और 10-20 ग्राम काले तिल रोज सुबह चबाकर खाने से स्मरणशक्ति तेज हो जाती है।
आँवले का रस और शुद्ध शहद समान मात्रा में लेकर मिला लें। इस मिश्रण को प्रतिदिन रात के समय आँखों में आँजने से आँखों का धुँधलापन कम हो जाता है। इस मिश्रण को पीने से भी फायदाहोता है।
मैंले दाँत चमकाने हों तो दाँतों पर आँवले के रस से मालिश करें। आँवले के रस में सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर हलकी मालिश करने से भी बहुत फायदा होता है।
250 ग्राम आँवले के चूर्ण में 50 ग्राम लहसुन पीसकर यह मिश्रण शहद में डुबाकर पंद्रह दिन तक धूप में रखें। उसके पश्चात हर रोज एक चम्मच मिश्रण खा लें। यह एक उत्तम हृदय-पोषक है। यह प्रयोग हृदय को मजबूत बनाने वाला एक सरल इलाजहै।
रक्तचाप, हृदय का बढ़ना, मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा जैसे रोगों में 20 ग्राम गाजर के रस के साथ 40 ग्राम आँवले का रस लेना चाहिए।
आधा भोजन करने के पश्चात हरे आँवलों का 30 ग्राम रस आधा गिलास पानी में मिलाकर पी लें। फिर शेष आधा भोजन करें। यह प्रयोग 21 दिन तक करें। इससे हृदय व मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है।
सूखे आँवले तथा सूखा धनिया समान मात्रा में लेकर रात को कुल्हड़ में इकट्ठे भिगो दें। सुबह छान के मिश्री मिलाकर पियें। इससे पेशाब की जलन दूर होती है तथामूत्ररोगों में लाभ होता है।
दो चम्मच कच्चे आँवले का रस और दो चम्मच कच्ची हल्दी का रस शहद के साथ लेने से प्रमेह मिट जाता है। कुछ दिनों तक प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रण में आ जाता है तथा सभी तरह के मूत्र-विकारों से छुटकारा मिल जाता है।
आँवले का चूर्ण गोमूत्र में घोंटकर शरीर पर लगाने से तुरंत पित्तियाँ दब जाती हैं।
अमृतफल आँवला
आँवला चाहे हरा हो या सूखा, जो भी इसका नियमित सेवन करेगा, उसकी जीवनशक्ति में प्रचंड वृद्धि होगी, वह निरोग रहेगा।
आँवला मस्तिष्क को तेज, श्वासरोगों को दूर, हृदय को मजबूत और नेत्रज्योति व आँतों की कार्यशक्ति में वृद्धि तो करता ही है, साथ ही यकृत को स्वस्थ बनाकर पाचनशक्ति में वृद्धि भी करता है। यह रक्तशुद्धि एवं रक्तसंचार में गुणकारी है तथा वीर्य का स्रोत है। यह आयुवर्धक तथा सात्विक वृत्ति उत्पन्न करके ओज एवं कांति कोबढ़ाने वाला है।
आँवले को विटामिन 'सी' का भंडार कहा जाता है। स्वस्थ रहने के लिए हमें रोज जितनी मात्रा में विटामिन 'सी' की आवश्यकता होती है, वह केवल एक आँवला ही पूरा कर सकता है।
विटामिन 'सी' शरीर के लगभग 300 कार्यों में अत्यधिक सहायक होता है। मस्तिष्क के कार्यों में विटामिन 'सी' की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए साधकों को नियमित रूप से आँवले का सेवन करना चाहिए।
संतरे की तुलना में आँवले में 20 गुना ज्यादा विटामिन 'सी' पाया जाता है। 100 ग्राम आँवले में 600 मिलीग्राम विटामिन 'सी' होता है, जबकि 100 ग्राम संतरे में 30 मि.ग्रा. ही विटामिन 'सी'होता है और सेवफल की तुलना में आँवले में 160 गुना विटामिन 'सी' तथा 3 गुना प्रोटीन होता है। आश्चर्य की बात यह है कि आँवले को उबालने, पीसने, भाप में पकाने या सुखाने पर भी उसमें उपस्थित विटामिन 'सी' की मात्रा में कमी नहीं आती है। यह गुण किसी भी अन्य फल या साग-सब्जी में नहीं होता।
मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से महिलाओं में आने वाली कमजोरी आँवले के सेवन से कम होती है।
रोज लगभग 20 से 30 ग्राम आँवले का मुरब्बा या चूर्ण खाने से भरपूर विटामिन 'सी' मिलता है, साथ ही पेट भी साफ रहता है। हृदय रोग में आँवले का मुरब्बा लाभकारी है। मधुमेह के रोगियों को ठंडी के मौसम में ताजे आँवले चबाकर खाने से या उसके रसपान से लाभ होता है। ठंडी के मौसम में 3-4 महीने तक रोज 2-3 ताजे आँवले का रस सुबह खाली पेट पीने से शरीर की सुस्ती व कमजोरी दूर होती है। बुखार में आँवले के रस का सेवन करने से मरीज को कमजोरीनहीं आती।
सुबह खाली पेट आँवले का सेवन करने से अधिक लाभ होता है। इससे हल्का बुखार, प्यास, जलन मिटती है। दाल-सब्जी पकाते समय उसमें आँवला डालकर उबालने से भी उसकी पौष्टिकता में वृद्धि होती है। कैंसर तथा टी.बी. जैसी खतरनाक व्याधियाँ भी आँवले के उपयोग से रोकी जा सकती हैं। स्नान करते समय आँवलों के चूर्ण का गाढ़ा घोल या उनका ताजा रस लगाकर स्नान करने से शरीर में निखार आता है और बाल रेशम जैसे मुलायम हो जाते हैं।
''जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगास्नान का फल मिलता है।'' (पद्म पुराण, उत्तर खण्ड)
भोजन के पहले 1-2 हरे आँवले खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है। भोजन के बीच-बीच में हरे आँवले के टुकड़े चबाकर खाने से पाचनक्रिया में सहायता मिलती है। भोजन के बाद आँवले खाने से अम्लपित्त के कारण पेट तथा गले में होने वाली जलन शांत होती है।
सावधानीः प्रसूता स्त्रियों को आँवले नहीं खाने चाहिए। अतिशय ठंडे वातावरण में शीत और नाजुकप्रकृतिवाले व्यक्तियों को कच्चे आँवले या उनके रस का उपयोग नहीं करना चाहिए। आँवले अत्यन्त शीतल होते हैं अतः सर्दी, खाँसी, कृमि, गठिया, बुखार, मंदाग्नि आदि आम, कफ व शीत प्रधान व्याधियों में मिश्री मिली हुई आँवले की सामग्रियों का त्याग करें। ऐसे व्यक्तियों को आँवले को गर्म करके या उष्ण-तीक्ष्ण द्रव्यों के साथ (जैसे चटनी बना के) उपयोग करना चाहिए।
औषधीय प्रयोग
हर्र, बहेड़ा, आँवला, घी-मिश्री संग खाय।
हाथी दाबै बगल में, तीन कोस ले जाय।।
हर्र, बहेड़ा, आँवला, जो शहद में खाय।
काँख चाप गजराज को, पाँच कोस ले जाय।।
हर्र, बहेड़ा, आँवला, चौथी डाल गिलोय।
पंचम जीरा डाल के, निर्मल काया होय।।
इस प्रयोग से शरीर में गर्मी, रक्त, चमड़ी तथा अम्लपित्त के रोग दूर होते हैं और शक्ति मिलती है।
आँवला घृतकुमारी के संग पीने से पित्त का नाश होता है।
15-20 मि.ली. आँवलों का रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से आँखों की रोशनी वृद्धि होती है।
सर्दी या कफ की तकलीफ हो तो आँवले के 15-20 मि.ली. रस या 1 ग्राम (पाव चम्मच) चूर्ण में 1 ग्राम हल्दी मिलाकर लें।
1-2 आँवले और 10-20 ग्राम काले तिल रोज सुबह चबाकर खाने से स्मरणशक्ति तेज हो जाती है।
आँवले का रस और शुद्ध शहद समान मात्रा में लेकर मिला लें। इस मिश्रण को प्रतिदिन रात के समय आँखों में आँजने से आँखों का धुँधलापन कम हो जाता है। इस मिश्रण को पीने से भी फायदाहोता है।
मैंले दाँत चमकाने हों तो दाँतों पर आँवले के रस से मालिश करें। आँवले के रस में सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर हलकी मालिश करने से भी बहुत फायदा होता है।
250 ग्राम आँवले के चूर्ण में 50 ग्राम लहसुन पीसकर यह मिश्रण शहद में डुबाकर पंद्रह दिन तक धूप में रखें। उसके पश्चात हर रोज एक चम्मच मिश्रण खा लें। यह एक उत्तम हृदय-पोषक है। यह प्रयोग हृदय को मजबूत बनाने वाला एक सरल इलाजहै।
रक्तचाप, हृदय का बढ़ना, मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा जैसे रोगों में 20 ग्राम गाजर के रस के साथ 40 ग्राम आँवले का रस लेना चाहिए।
आधा भोजन करने के पश्चात हरे आँवलों का 30 ग्राम रस आधा गिलास पानी में मिलाकर पी लें। फिर शेष आधा भोजन करें। यह प्रयोग 21 दिन तक करें। इससे हृदय व मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है।
सूखे आँवले तथा सूखा धनिया समान मात्रा में लेकर रात को कुल्हड़ में इकट्ठे भिगो दें। सुबह छान के मिश्री मिलाकर पियें। इससे पेशाब की जलन दूर होती है तथामूत्ररोगों में लाभ होता है।
दो चम्मच कच्चे आँवले का रस और दो चम्मच कच्ची हल्दी का रस शहद के साथ लेने से प्रमेह मिट जाता है। कुछ दिनों तक प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रण में आ जाता है तथा सभी तरह के मूत्र-विकारों से छुटकारा मिल जाता है।
आँवले का चूर्ण गोमूत्र में घोंटकर शरीर पर लगाने से तुरंत पित्तियाँ दब जाती हैं।
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