प्राकृतिक चिकित्सा

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इन तीन बातों की अत्यधिक आवश्यकता होती है – स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन तथा सम्मानित जीवन। सुख का आधार स्वास्थ्य है तथा सुखी जीवन ही सम्मान के योग्य है।

आयुर्वेद का अनुपम उपहार

अच्युताय हरिओम उत्पाद

स्वास्थ्य का सच्चा मार्ग

स्वास्थ्य का मूल आधार संयम है।

सर्दियों के लिए विशेष

अच्युताय हरिओम उत्पाद

Achyutaya HariOm Panchamrit Ras :अच्युताय हरिओम पंचामृत रस : स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग

Achyutaya HariOm Santkripa Surma : अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा - आँखों को सुरक्षित, निरोगी, तेजस्वी बनाने की क्षमता रखने वाला अदभुत योग

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Tuesday, 20 August 2013

शराब की आदत छुडाने के लिए

शराब की आदत छुडाने के लिए

Monday, 19 August 2013

नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए

नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए

वर्षा ऋतु की विशेष

वर्षा ऋतु की विशेष


अभी वर्षा ऋतु है | इसे शास्‍त्रीय भाषा में आदानकाल बोलते है | जठराग्नि दुर्बल होती है | वायु, गैस की तकलीफें उभरती है | पित्त संचित होता है | अगर सावधान नहीं रहें तो पित्त व वात मिलकर हार्ट अटैक बना सकता है | इस आदानकाल में कब्जियत न रहे इसका ध्‍यान रखना चाहिए |

करने योग्य

१) पेट साफ़ रहे इसके लिए अच्युतायहरड-रसायन २ -२ गोली खाना | हरड रसायन , रसायन से बना हुआ टोनिक है दिनभर खाया हुआ टोनिक बन जायेगा |
२) शुद्ध वातावरण व शुद्ध जल का सेवन करना |
३) मधुर भोजन, चिकनाईवाला, शरीर को बल देनेवाला भोजन करना चाहिये और दोपहर के भोजन में नींबू, अदरक, सैंधा नमक, लौकी, मैथी, खीरा, तुरई आदि खाने चाहिए |
४) वर्षाऋतु में पानी गरम करके पीयें अथवा तो पानी की शुद्धता का ध्यान रखे |
५) वायुप्रकोप से जोडों मे दर्द बनने की संभावना है और बुढ़ापे में लकवा मारने की संभावना बढ़ जाती है | भोजन में लहसुन की छौंक लकवे से फाईट करता है |
६) चर्मरोग, रक्तविकार आदि बिमारियों की इस ऋतु में संभावना बढ़ जाती है | नींबू, अदरक, गाजर, खीरा स्वास्थ्‍यप्रद रहेगा |
७) सूर्यकिरण स्नान सभी ऋतुओं में स्वास्थ्‍य के लिए हितकारक है |
८) अश्विनी मुद्रा- श्वांस रोककर योनि संकोच लेना और मन में भगवान का जप करना इस सीज़न की बि‍मारि‍यों को भगाने की एक सुंदर युक्ति है |
न करने योग्य
  • १) गरम, तले हुए, रूखे, बासी, डबल रोटी, आटा लगा हुआ बिस्किट आदि स्वास्थ के लिए इस सीज़न में हितकर नहीं है । फास्ट फ़ूड से बचना चाहिए |
  • २) देर रात बारिश के सीज़न में न जागें |
  • ३) अधिक श्रम, अधिक व्यायाम न करें |
  • ४) खुले आकाश में सोना खतरे से खाली नहीं है ।
  • ५) ज्यादा देर तक शरीर भीगा हुआ न रखें | सिर गिला हो तो तुरंत पौंछ लें।
  • ६) भीगे शरीर न सोयें और रात्रि को स्नान न करें | मासिक धर्म आये तो तुरंत स्नान करके सूखे कपडे से अपने को पौंछ लें |

Rainy season special :-

This is rainy season now. In our scriptures, it is termed as Adaankaal. Digestive power remains weak. Windage related problems are on the rise. Pitta starts accumulating in the body. If proper care is not taken, Pitta and Vaat can come together to cause heart attack. One must also take care to avoid constipation during this period.

Things to do:

1. To keep the stomach clear, consume 2--2 tablets of Achyutaya  Harad Rasayan . This converts food consumed during the entire day into tonic.
2. Live in clear atmosphere and drink clean water at all times.
3. Should consume sweet foods, food with oil content, and ones which rejuvenate the body. In the afternoon meals, it is advised to take lemon, ginger, rock salt, bottle gourd, methi, cucumber, turai, etc.
4. In rainy season, either drink luke warm water or ensure proper cleanliness of drinking water .
5. Due to impact of Vayu(air) in the body, joint pain is a possibility and also increases the risk of paralysis in old age. Consuming fried garlic in meals helps fight against paralysis.
6. Chances of skin diseases, blood disorders, etc. increase during this season. Lemon, ginger, carrots, cucumber etc. are considered very healthy to avoid this.
7. Sun bathing is considered highly beneficial to health in all seasons.
8. Ashwini Mudra - Stop your breath and draw your reproductive region and then do japa of God's name in your mind. This is a beautiful technique to drive away all ailments of this season.

Things to avoid:

1. Hot, deep fired, dry, stale, double roti, biscuits coated with flour, etc. are not healthy for this season. Must also abstain from fast foods.
2. Should not stay awake late in the night in this season.
3. Avoid excessive exercising or work outs.
4. Sleeping under the open sky can be very dangerous.
5. Do not remain on a wet body in this season. If head becomes wet, wipe it out quickly.
6. Do not sleep with wet clothes and never take bath at night. During menstrual cycles, wipe your body straightaway with a dry piece of cloth after bath.

Sunday, 18 August 2013

शक्तिदायक नारियल

शक्तिदायक नारियल


नारियल शीतल, स्निग्ध, बलदायी, शरीर को मोटा करने वाला तथा वायु व पित्त को शांत करने वाला है। सूखा नारियल वीर्यवर्धक है। इसमें कार्बोहाइड्रेटस, प्रोटीन्स, वसा, कैल्शियम, पोटैशियम, सोडियम, लौह, विटामिन 'सी' आदि प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं।
इन गुणों के कारण नारियल आंतरिक गर्मी, अम्लपित्त (एसिडिटी), आमाशय व्रण(अल्सर), क्षयरोग(टी.बी.), दुर्बलता, कृशता व वीर्य की अल्पता में लाभदायी है। यह पचने में भारी होता है इसलिए मात्र 10 से 20 ग्राम की मात्रा में खूब चबा-चबाकर खायें। इसकी बर्फी या चटनी बनाकर अथवा सब्जी में मिलाकर भी खा सकते हैं। नारियल बालक व गर्भवती माताओं के लिए विशेष पोषक तत्त्वों की पूर्ति कर देता है।
पौष्टिक चबैनाः छुहारा, सूखा नारियल व मिश्री के छोटे-छोटे टुकड़े कर मिलाकर रख लें। टॉफी-चाकलेट के स्थान पर बच्चों को यह पौष्टिक चबैना दें। इससे दाँत, हड्डियाँ मजबूत बनेंगे व बुद्धि का भी विकास होगा।और भी स्वास्थ्य वर्धक पौष्टिक लेखों को आप विस्तार से हरिओमकेयर डॉट कॉम पर देखें ।
सूचनाः अष्टमी के दिन नारियल खाने से बुद्धि का नाश होता है।
(ब्रह्म वैवर्त पुराण)
* नारियल तेल की मालिश से मस्तिष्क भी ठंडा रहता है।

* गर्मी में लगने वाले दस्तों में एक कप नारियल पानी में पिसा जीरा मिलाकर पिलाने से दस्तों में तुरंत आराम मिलता है।

* बुखार के कारण बार-बार लगने वाली प्यास के इलाज के लिए नारियल की जटा को जलाकर गर्म पानी में डालकर रख दें। जब यह पानी ठंडा हो जाए तो छानकर इसे रोगी को पीने दें। इससे प्यास मिटती है।

* आँतों में कृमि की समस्या से निपटने के लिए हरा नारियल पीसकर उसकी एक-एक चम्मच मात्रा का सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। कृमि की समस्या से निपटने के लिए अच्युतायकोष्ठ शुद्धि कल्प एक सुंदर उपाय है ।

* नारियल के पानी की दो-दो बूँद सुबह-शाम कुछ दिनों तक नाक में टपकाने से आधा सीसी के दर्द में बहुत आराम मिलता है।

* नारियल की मलाई से आपको मैग्नीज की दैनिक आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है. यह खनिज रक्त के थक्के हटाने में सहायक कारकों के निर्माण में मदद करता है. इसमें 15 प्रतिशत पोटैशियम होता है, जो मांसपेशियों, हड्डियों और पाचनतंत्र को सही रखने में मदद करता है.

* नारियल का पानी त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है. इसे नियमित रूप से त्वचा पर लगाने से दाग-धब्बे तो दूर होते हैं और त्वचा जवां नजर आने लगती है. यह बहुत अच्छा क्लींजर होता है जिसका प्रयोग त्वचा के डेटोक्सीफाइंग के रूप में किया जाता है.


* गर्मियों में नारियल पानी के सेवन से, आपको दिव्य आनंद प्राप्त होगा। यह केवल आपको ताजगी ही नहीं, बल्कि इस में कई सारे स्वास्थवर्धक गुण भी छुपे हैं। नारियल पानी में विटामिन, मिनरल, इलेक्ट्रोलाइट्स, एंजाइमस्, एमिनो एसिड और साइटोकाइन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। आपको यह जान कर हैरानी होगी कि नारियल पानी महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य के लिये बहुत ही अच्‍छा माना गया है। यदि पेशाब में जलन हो रही हो, डीहाड्रेशन हो गया हो, त्‍वचा में निखार चाहिये हो या फिर मोटापा घटाना हो तो नारियल पानी पीजिये। नारियल की तासीर ठंडी होती है इसलिए नारियल का पानी हल्का, प्यास बुझाने वाला, अग्निप्रदीपक, वीर्यवर्धक तथा मूत्र संस्थान के लिए बहुत उपयोगी होता है। इसमें स्वास्थवर्धक गुण तो है ही, साथ ही इसकी ताजगी से भरा स्वाद इसे पूरे विश्व में लोकप्रिय बनाता है।

कहकर सिखाने की बजाए…

कहकर सिखाने की बजाए


Friday, 16 August 2013

अँगूठा या उँगली पक जाये तो..?

अँगूठा या उँगली पक जाये तो..?
 


अँगूठा पकनाः अँगूठा पकने पर दर्द व जलन के कारण बेचैनी होती है। निम्नलिखित प्रयोग से बिना चीरफाड़ के इससे छुटकारा मिलता है।


प्रयोग विधिः अँगूठे पर आक के दूध की कुछ बूँदें टपकाकर ऊपर से आक का पत्ता बाँध दें। तीन घंटे के अंतर से यह प्रक्रिया दोहराते रहें। इससे अँगूठा पककर मवाद बाहर निकल आयेगा। जब तक मवाद निकलता रहे तब तक यह प्रक्रिया दोहराते रहें। बाद में नीम के पत्ते डालकर उबाले हुए पानी से घाव को धो लें, फिर नीम की पत्तियों को पीसकर बाँध दें। घाव भरकर ठीक हो जायेगा।

बुरे सपने आते हों तो..?

बुरे सपने आते हों तो..?

यदि कोई शिशु रात को चौंकता है

यदि कोई शिशु रात को चौंकता है

Thursday, 15 August 2013

एंटीबायोटिक भी कुछ नहीं लगते खराश मिटाने वाले इन रामबाण उपायों के आगे

एंटीबायोटिक भी कुछ नहीं लगते खराश मिटाने वाले इन रामबाण उपायों के आगे
गले में खराश की समस्या सामान्य रूप से वाइरस या बैक्टिरिया के संक्रमण के कारण होती है। कभी - कभी एंटिबायोटिक्स लेने पर भी खराश पीछा नहीं छोड़ती है। माना जाता है ऐसा पेट के एसिड में अनैसर्गिक कमी होने का कारण हो सकता है। ऐसे में घरेलु उपचार ही सबसे कारगर होते हैं। अगर लंबे समय से गले की खराश से परेशान हैं तो नीचे लिखे उपाय जरूर अपनाएं।


- 1-2
लहसुन की कलियाँ और 2लोंग ले कर उसका पेस्ट बनाये और उसे 1 कप मधु के साथ मिलाएं। इस घोल का 1 चम्मच सुबह शाम सेवन करें।

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तुलसी की पत्तियों को उबालकर पीने से गले की खराश दूर हो जाती है।(तुलसी की जगह आप अच्युताय तुलसी अर्क का प्रोयोग भी कर सकते है )

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गरम दूध में जरा सा हल्दी पावडर मिला के सोने से पहले सेवन करने पर भी आराम मिलता है।


-
एक पूरा प्याज को थोड़े से पानी में उबालें।उसके बाद उसे पीस कर उसमे थोड़ा मक्खन नमक मिला ले और इस पेस्ट का सेवन करें। एक बार में ही आराम मिल जायेगा।


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शहद में अदरक का रस मिलाकर सेवन करें।


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सौंफ  चबाने से भी गले की खराश दूर होती है।



नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी

नमक का ये आसान प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार की छुट्टी


बदलते मौसम में बुखार की चपेट में आना एक आम बात है। कभी वायरल फीवर के नाम पर तो कभी मलेरिया जैसे नामों से यह सभी को अपनी चपेट में ले लेता है। फिर बड़ा आदमी हो या कोई बच्चा इस बीमारी की चपेट में आकर कई परेशानियों से घिर जाते हैं। कई बुखार तो ऐसे हैं जो बहुत दिनों तक आदमी को अपनी चपेट में रखकर उसे पूरी तरह से कमजोर बना देता है। पर घबराइए नहीं सभी तरह के बुखार की एक अचूक दवा है भुना नमक। इसके प्रयोग किसी भी तरह के बुखार को उतार देता है।



भुना नमक बनाने की विधि- खाने मे इस्तेमाल आने वाला सादा नमक लेकर उसे तवे पर डालकर धीमी आंच पर सेकें। जब इसका कलर कॉफी जैसा काला भूरा हो जाए तो उतार कर ठण्डा करें। ठण्डा हो जाने पर एक शीशी में भरकर रखें।जब आपको ये महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले एक चाय का चम्मच एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर ले लें। जब आपका बुखार उतर जाए तो एक चम्मच नमक एक बार फिर से लें। ऐसा करने से आपको बुखार कभी पलट कर नहीं आएगा।



विशेष :-
- हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों को यह विधि नहीं अपनानी चाहिए।


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यह प्रयोग एक दम खाली पेट करना चाहिए इसके बाद कुछ खाना नहीं चाहिए और ध्यान रखें कि इस दौरान रोगी  को ठण्ड न लगे।


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अगर रोगी को प्यास ज्यादा लगे तो उसे पानी को गर्म कर उसे ठण्डा करके दें।


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इस नुस्खे को अजमाने के बाद रोगी को करीब 48 घंटे तक कुछ खाने को न दें। और उसके बाद उसे दूध चाय या हल्का दलिया बनाकर खिलाऐं।
सादा बुखार

 सादे बुखार में उपवास अत्यधिक लाभदायक है। उपवास के बाद पहले थोड़े दिन मूँग लें फिर सामान्य खुराक शुरु करें। ऋषि चरक ने लिखा है कि बुखार में दूध पीना सर्प के विष के समान है अतः दूध का सेवन न करें।

पहला प्रयोगः सोंठ, तुलसी, गुड़ एवं काली मिर्च का 50 मि.ली काढ़ा बनाकर उसमें आधा या 1 नींबू निचोड़कर पीने से सादा बुखार मिटता है।

दूसरा प्रयोगः शरीर में हल्का बुखार रहने पर, थर्मामीटर द्वारा बुखार न बताने पर थकान, अरुचि एवं आलस रहने पर संशमनी की दो-दो गोली सुबह और रात्रि में लें। 7-8 कड़वे नीम के पत्ते तथा 10-12 तुलसी के पत्ते खाने से अथवा पुदीना एवं तुलसी के पत्तों के एक तोला रस में 3 ग्राम शक्कर डालकर पीने से हल्के बुखार में खूब लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः कटुकी, चिरायता एवं इन्द्रजौ प्रत्येक की 2 से 5 ग्राम को 100 से 400 मि.ली. पानी में उबालकर 10 से 50 मि.ली. कर दें। यह काढ़ा बुखार की रामबाण दवा है।

चौथा प्रयोगः बुखार में करेले की सब्जी लाभकारी है।

पाँचवाँ प्रयोगः मौठ या मौठ की दाल का सूप बनाकर पीने से बुखार मिटता है। उस सूप में हरी धनिया तथा मिश्री डालने से मुँह अथवा मल द्वारा निकलता खून बन्द हो जाता है।

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