प्राकृतिक चिकित्सा

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इन तीन बातों की अत्यधिक आवश्यकता होती है – स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन तथा सम्मानित जीवन। सुख का आधार स्वास्थ्य है तथा सुखी जीवन ही सम्मान के योग्य है।

आयुर्वेद का अनुपम उपहार

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स्वास्थ्य का सच्चा मार्ग

स्वास्थ्य का मूल आधार संयम है।

सर्दियों के लिए विशेष

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Achyutaya HariOm Santkripa Surma : अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा - आँखों को सुरक्षित, निरोगी, तेजस्वी बनाने की क्षमता रखने वाला अदभुत योग

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Wednesday, 7 August 2013

पेट में हों कीडे तो इससे अच्छा नहीं मिलेगा उपाय

पेट में हों कीडे तो इससे अच्छा नहीं मिलेगा उपाय


हमारे पेट में कुछ परजीवी अपना आसरा बनाकर रहते हुए। कुछ शरीर से बाहर निवास करते हैं तो कुछ शरीर के अन्दर हमारे ही भोजन पर निर्भर रहते हैं।
ये जीव अपनी संख्या में वृद्धि कर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाते है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के अनुसार ये परजीवी गोलकृमी,फीता कृमी,पिनकृमी आदि नामों से जाने जाते हैं। इनमें कुछ  हेल्मिन्थवर्ग के जीव हैं। जो धीरे-धीरे अपनी संख्या को बढाते हैं। कुछ सूक्ष्म जीव अमीबा। जैसे होते हैं जो शरीर में सहजीवी के रूप में रहते हैं तथा शरीर में पाचन सहित मल निर्माण क़ी प्रक्रिया में भी भाग लेते है।

लेकिन कुछ जीव परजीवी के रूप में रहकर आतों क़ी श्लेष्मा झिल्ली को नुकसान पहुंचाते हैं। आयुर्वेद में भी इन कृमियों के इलाज के लिए कुछ नुस्खे बताये गए हैं। जो इन्हें खींच कर बाहर निकालते हैं तथा इनकी प्रकृति से उलट होने के कारण इन्हें जीने के विपरीत वातावरण बना देते हैं। इसके अलावा यदि इनके उत्पन्न होने वाले कारणों को छोड़ दिया जाए तो ये फिर कभी नहीं पनपते हैं। आयुर्वेद में बताये  गए 20 प्रकार के इन कृमियों की चिकित्सा हेतु कुछ नायाब नुस्खे निम्न हैं , जिनका उचित प्रयोग इन्हें निर्मूल कर सकता है ।
- अजवायन का चूर्ण बनाकर आधा ग्राम लेकर समभग गुड में गोली बनाकर दिन में तीन बार खिलाने से सभी प्रकार के पेट के कीडे नष्ट होते है।
- सुबह उठते ही बच्चे दस ग्राम (और बडे २५ ग्राम) गुड खाकर दस - पन्द्रह मिनट आराम करें। इससे आंतों में चिपके सब कीडे निकलकर एक जगह जमा हो जायेंगे। फिर बच्चे आधा ग्राम (और बडे एक - दो ग्राम) अजवायन का चुर्ण बासी पानी के साथ खायें। इससे आंतों में मौजूद सब प्रकार के कीडे एकदम नष्ट होकर मल के साथ शीघ्र ही बाहर निकल जाते हैं।
- कृमी नाशक ,,अच्युताय कोष्ठ शुद्धि कल्प ,, खाने से पेट के कीडों का नाश होता है।
- अजवायन चूर्ण आधा ग्राम में चुटकी भर काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बालकों के कीडे नष्ट होते हैं। बडे अजवायन के चुर्ण चार भाग में काला नमक एक भाग मिलाकर दो ग्राम की मात्रा से गर्म पानी के साथ लें।
- अजवायन का चूर्ण आधा ग्राम, साठ ग्राम मट्ठे या छाछ के साथ और बडो को दो ग्राम १२५ ग्राम मट्ठे के साथ देने से पेट के कीडे नष्ट होकर मल के साथ बाहर निकल जाते है।


- कमीला और बायबिडंग दोनो को बराबर बराबर लेकर पीस लें, बच्चों को एक ग्राम और बडों को तीन ग्राम सोने से पूर्व रात को दूध से दें,कीडे मर कर पेट से बाहर निकल जायेंगे।

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करंज क़ी गिरी ,पलाश के बीज,देशी अजवाइन और विडंग इन सबको मिलाकर चूर्ण बनाकर 4,6 ग्राम क़ी मात्रा में गुड के साथ गुनगुने पानी से देने पर पेट के कृमी नष्ट होते हैं।


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पारसीक अजवायन ,नागरमोथा,पीपर,काकडासींगी,वायविडंग। एवं अतीश को समभाग लेकर 4,6 ग्राम क़ी मात्रा में गुड के  साथ खिलाने से पेट के कृमी मर कर बाहर निकल जाते हैं।

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भद्रमुस्तादीक्वाथ, कृमीमुद्गररस, कृमीकुठाररस,विडंगारिष्ट,मुस्तकारिष्ट आदि कुछ ऐसी आयुर्वेदिक औषधियां हैं जिनका चिकित्सक के निर्देशन में प्रयोग बच्चों से लेकर बड़ों तक के पेट में पाए जानेवाले कीड़ों को दूर कर सकता है आवश्यकता है तो सिर्फ अच्छी तरह से धोकर उबालकर और पकाकर भोजन करने की।
-भात के मांड में बायविडंग और त्रिफ़ला का चूर्ण डालकर पीने से पेट के कीडों का नाश होता है।
- पांच ग्राम ढाक के बीज लेकर मट्ठे के साथ रात को निगल जायें,सुबह मल में मरे हुये कीडे निकल जायेंगे।
सिर के कृमी :-
- धतूरे के पत्तों का रस या पान के पत्तों का रस को कपूर मिलाकर एक कपडे के टूकडे में लेप करें,अब इस कपडे को सिर में बांधकर रात में आराम से सो जाएँ प्रात:काल बालों को अच्छी तरह धोइए इससे सिर के सारे कृमी मर जायेंगे ।
-पलाश के बीज वायविडंग। चिरायता और नीम के सूखे पत्ते समान भाग में लेकर धतूरे के पत्ते के स्वरस के साथ पीसकर मालिश या लेप करें त्वचा या बालों के कृमी दूर हो जाते हैं।


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