प्राकृतिक चिकित्सा

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में इन तीन बातों की अत्यधिक आवश्यकता होती है – स्वस्थ जीवन, सुखी जीवन तथा सम्मानित जीवन। सुख का आधार स्वास्थ्य है तथा सुखी जीवन ही सम्मान के योग्य है।

आयुर्वेद का अनुपम उपहार

अच्युताय हरिओम उत्पाद

स्वास्थ्य का सच्चा मार्ग

स्वास्थ्य का मूल आधार संयम है।

सर्दियों के लिए विशेष

अच्युताय हरिओम उत्पाद

Achyutaya HariOm Panchamrit Ras :अच्युताय हरिओम पंचामृत रस : स्वास्थय व ऊर्जा प्रदायक, पाचक, व रोगनाशक अदभुत योग

Achyutaya HariOm Santkripa Surma : अच्युताय हरिओम संतकृपा सुरमा - आँखों को सुरक्षित, निरोगी, तेजस्वी बनाने की क्षमता रखने वाला अदभुत योग

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Friday, 19 July 2013

स्वप्न दोष-प्रदर दोष के निवारण हेतु शुक्र गायत्री मंत्र प्रयोग

स्वप्न दोष-प्रदर दोष के निवारण हेतु शुक्र गायत्री मंत्र प्रयोग




स्वप्नदोष और प्रदर दोष की बीमारी जिनको रहती है, दवाओं से नहीं मिटती | दवा में दम नहीं बीमारी मिटाने का .....जब तक आदमी अंतिष्ट ठीक नहीं होता तब तक ये बीमारी रहेगी | और अंतिष्ट ठीक न हो तो शुक्र गायत्री  भी बोल सकते है |


ॐ भृगुजाताय विद्महे, दिव्य देहाय धीमहि, तन्नो शुक्र प्रचोदयात् |

ॐ शुक्राय नम: ॐ शुक्राय नम: |

घर में रात को छत पर चले गये २ - ३ मिनट के लिए अब शुक्र का तारा कौनसा है सबको पता नहीं होगा ना तो सामूहिक रूप से जो कोई शुक्र का तारा है उसको मेरा प्रणाम है | मैं शुक्रवान बनू, वीर्यवान बनू, मेरे में ये तकलीफ न रहे |
ॐ भृगुजाताय विद्महे , दिव्य देहाय धीमहि, तन्नो शुक्र प्रचोदयात् | ॐ शुक्राय नम: ॐ शुक्राय नम:
वो व्यक्ति शुक्रवान होगा |

और रात को सोये तो ऐसे सोये कि मैं मेरे मालिक के गोद में सिर रख के सो रहा हूँ | अपने चारों तरफ घेरा बना दो राम नाम का, मेरे चारों तरफ घेरा है राम नाम का फालतू विचार या विकार को मेरे पास आने की ताकत नहीं है |


Troubled with nightfalls or night discharges


Ailment of nightfalls or night discharges cannot be cured by medicines. Medicines do not have the capacity to cure such ailments... until one develops an internal resolve to overcome such diseases. If troubled internally by such desires, one can also recite Shukra Gayatri.


AUM BHRIGUJATAYA VIDMAHE, DIVYA DEHAAYA DHIMAHI, TANNO SHUKRA PRACHODAYAAT |
AUM SHUKRAYA NAMAH | AUM SHUKRAYA NAMAH |


During night time, go to the roof of your home, even if you cannot locate the Venus, then you can offer a communal prayer to all stars and directing your prayers to Venus star. May I be Shukrawaan, may I develop strength and virility, may I no longer have this trouble any more.


AUM BHRIGUJATAYA VIDMAHE, DIVYA DEHAAYA DHIMAHI, TANNO SHUKRA PRACHODAYAAT |
AUM SHUKRAYA NAMAH | AUM SHUKRAYA NAMAH |


Then, virility will develop in such person.

Then while going to sleep one should fall asleep as if one is lying down in the lap of one's master. I have a powerful protective ring of Lord Rama around me and no impure or useless thoughts can ever misguide me.




Monday, 15 July 2013

माहवारी (मासिक धर्म) के सभी दोषों को दूर करना

माहवारी (मासिक धर्म) के सभी दोषों को दूर करना



1. किशमिश: पुरानी किशमिश को 3 ग्राम
की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिलीलीटर पानी में
रात को भिगोकर रख दें। सुबह इसे उबालकर रख लें। जब
यह एक चौथाई की मात्रा में रह जाए तो इसे छानकर सेवन
करने से मासिक-धर्म के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं।
2. तिल: काले तिल 5 ग्राम को गुड़ में मिलाकर
माहवारी (मासिक) शुरू होने से 4 दिन पहले सेवन
करना चाहिए। जब मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे बंद
कर देना चाहिए। इससे माहवारी सम्बंधी सभी विकार
नष्ट हो जाते हैं।
लगभग 8 चम्मच तिल, एक गिलास पानी में गुड़ या 10 कालीमिर्च को (इच्छानुसार) पीसकर गर्म कर लें।
आधा पानी बच जाने पर 2 बार रोजाना पीयें, यह मासिक-
धर्म आने के 15 मिनट पहले से मासिकस्राव तक सेवन
करें। ऐसा करने से मासिक-धर्म खुलकर आता है।
14 से 28 मिलीलीटर बीजों का काढ़ा एक ग्राम मिर्च
के चूर्ण के साथ दिन में तीन बार देने से मासिक-धर्म खुलकर आता है।
तिल, जौ और शर्करा का चूर्ण शहद में मिलाकर
खिलाने से प्रसूता स्त्रियों की योनि से खून
का बहना बंद हो जाता है।
3. ज्वार: ज्वार के भुट्टे को जलाकर इसकी राख को छान
लें। इस राख को 3 ग्राम की मात्रा में पानी से सुबह के समय
खाली पेट मासिक-धर्म चालू होने से लगभग एक सप्ताह
पहले देना चाहिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए
तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म
के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।
4. चौलाई: चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक
पीस लें। इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय
खाली पेट मासिक-धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले
सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन
बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार
नष्ट हो जाते हैं। सुरेश चौहान
5. असगंध: असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर
बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से
खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले
सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन
बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार
नष्ट हो जाते हैं। सुरेश चौहान
6. रेवन्दचीनी: रेवन्दचीनी 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के
समय खाली पेट माहवारी (मासिक धर्म) शुरू होने से
लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक-धर्म शुरू
हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे
मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।
7. कपूरचूरा: आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4
गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक
गोली का सेवन माहवारी शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले
स्त्री को सेवन करना चाहिए। मासिक-धर्म शुरू होने के
बाद इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे मासिक-धर्म
के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं। सुरेश चौहान
8. राई: मासिक-धर्म में दर्द होता हो या स्राव कम
होता हो तो गुनगुने पानी में राई के चूर्ण को मिलाकर,
स्त्री को कमर तक डूबे पानी में बैठाने से लाभ होता है।
9. मूली: मूली के बीजों का चूर्ण सुबह-शाम जल के साथ 3-3
ग्राम सेवन करने से ऋतुस्राव (माहवारी) का अवरोध नष्ट
होता है। सुरेश चौहान
10. अडूसा (वासा): अड़ूसा के पत्ते ऋतुस्त्राव
(मासिकस्राव) को नियंत्रित करते हैं। रजोरोध
(मासिकस्राव अवरोध) में वासा पत्र 10 ग्राम, मूली व
गाजर के बीज प्रत्येक 6 ग्राम, तीनों को 500
मिलीलीटर पानी में पका लें। चतुर्थाश शेष रहने पर यह
काढ़ा कुछ दिनों तक सेवन करने से लाभ होता है।
11. कलौंजी: 2-3 महीने तक भी मासिक-धर्म के न होने
पर और पेट में भी दर्द रहने पर एक कप गर्म पानी में
आधा चम्मच कलौंजी का तेल और 2 चम्मच शहद
मिलाकर सुबह-शाम को खाना खाने के बाद सोते समय 30
दिनों तक पियें। नोट: इस प्रयोग के दौरान आलू और
बैगन नहीं खाना चाहिए। सुरेश चौहान
12. विदारीकन्द: विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और
मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर 1 चम्मच घी के साथ
मिलाकर रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक-धर्म
में अधिक खून आना बंद होता है।
विदारीकन्द के 1 चम्मच चूर्ण को घी और चीनी के साथ
मिलाकर चटाने से मासिक-धर्म में अधिक खून आना बंद हो जाता है।
13. उलटकंबल: उलटकंबल की जड़ की छाल का गर्म
चिकना रस 2 ग्राम की मात्रा में कुछ समय तक रोज देने
से हर तरह के कष्ट से होने वाले मासिक-धर्म में लाभ
मिलता है।सुरेश चौहान
उलटकंबल की जड़ की छाल को 6 ग्राम लेकर 1 ग्राम
कालीमिर्च के साथ पीसकर रख लें। इसे मासिक धर्म से 7 दिनों पहले से और जब तक मासिक-धर्म होता रहता है
तब तक पानी के साथ लेने से मासिक-धर्म नियमित
होता है। इससे बांझपन दूर होता है और गर्भाशय
को शक्ति प्राप्त होती है।
अनियमित मासिक-धर्म के साथ ही, गर्भाशय, जांघ
और कमर में दर्द हो तो उलटकंबल की जड़ का रस 4 ग्राम निकालकर चीनी के साथ सेवन करने से 2 दिन में ही लाभ
मिलता है।
उलटकंबल की 50 ग्राम सूखी छाल को जौ कूट
यानी पीसकर 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर
काढ़ा तैयार करें। यह काढ़ा उचित मात्रा में दिन में 3 बार
लेने से कुछ ही दिनों में मासिक-धर्म नियमित समय पर होने लग जाता है। इसका प्रयोग मासिक धर्म शुरू होने
से 7 दिन पहले से मासिक-धर्म आरम्भ होने तक दें।
उलटकंबल की जड़ की छाल का चूर्ण 4 ग्राम और
कालीमिर्च के 7 दाने सुबह-शाम पानी के साथ मासिक-
धर्म के समय 7 दिन तक सेवन करें। 2 से 4 महीनों तक
यह प्रयोग करने से गर्भाशय के सभी दोष मिट जाते हैं। यह प्रदर और बन्ध्यत्व की सर्वश्रेष्ठ औषधि है। सुरेश चौहान
14. अनन्नास: अनन्नास के कच्चे फलों के 10
मिलीलीटर रस में, पीपल की छाल का चूर्ण और गुड़ 1-1
ग्राम मिलाकर सेवन करने से मासिक-धर्म की रुकावट
दूर होती है।
अनान्नास के पत्तों का काढ़ा एक चौथाई ग्राम पीने से
भी मासिक-धर्म की रुकावट दूर होती है। सुरेश चौहान
15. बथुआ: 2 चम्मच बथुआ के बीज 1 गिलास पानी में
उबालें। आधा पानी बच जाने पर छानकर पीने से रुका हुआ
मासिकधर्म खुलकर साफ आता है।


Monday, 18 February 2013

तन-मन से निरोग-स्वस्थ व तेजस्वी संतान-प्राप्ति के नियम



तन-मन से निरोग-स्वस्थ व तेजस्वी संतान-प्राप्ति के नियम


गृहस्थ जीवन की सफलता उत्तम संतान की प्राप्ति में मानी जाती है किन्तु मनुष्य यह नहीं जानता कि कुछ नियमों का पालन उसे दिव्य, तेजस्वी एवं ओजस्वी संतान प्रदान करने में सहायक होता है। अगर निम्नांकित नियमों को जानकर उसका पालन किया जाये तो उत्तम, स्वस्थ संतान की प्राप्ति हो सकती है।
ऋतुकाल की चौथी, छठी, आठवीं और बारहवीं रात्रि में स्त्रीसंग करके पुरुष दीर्घायुवाला पुत्र उत्पन्न करता है। पुत्र की इच्छा रखनेवाली स्त्री को इस रात्रि में लक्ष्मणा (हनुमान बेल) की जड़ को दूध में घिसकर उसकी दो तीन बूँदे दायें नथुने में डालनी चाहिए।
ऋतुकाल की पाँचवी, नवमी और ग्यारहवीं रात्रि में स्त्रीसंग करके गुणवान कन्या उत्पन्न करता है किन्तु सातवीं रात्रि में स्त्रीसंग करने से दुर्भांगी कन्या उत्पन्न होती है।
ऋतुकाल की तीन रात्रियों में, प्रदोष काल में, अमावस्या, पूर्णिमा, ग्यारस अथवा ग्रहण के दिनों में एवं श्राद्ध तथा पर्व दिनों में संयम न रखने वाले गृहस्थों के यहाँ कम आयुवाले, रोगी, दुःख देने वाले एवं विकृत अंगवाले बच्चों का जन्म होता है। अतः इस बात का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।
तेजस्वी पुत्र की इच्छा रखनेवाले स्त्री-पुरुष दोनों को उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर शैया पर निम्नलिखित वेदमंत्र पढ़ना चाहिए।
अहिरसि, आयुरसि, सर्वतः प्रतिष्ठासि धाता।
त्वा दधातु विधाता त्वा दधातु ब्रह्मवर्चसा भवेदिति।।
ब्रह्मा बृहस्पतिर्विष्णुः सोमः सूर्यस्तथाऽश्विनौ।
भगोऽथ मित्रावरु्णौ वीरं दधतु मे सुतम्।।




गर्भवती स्त्री द्वारा रखने योग्य सावधानी


उकड़ू बैठना, ऊँचे नीचे स्थान एवं कठिन आसन में बैठना, वायु, मल-मूत्र का वेग रोकना, शरीर जिसके लिए अभ्यस्त न हो ऐसा कठिन व्यायाम करना, तीखे, गरम, खट्टे, दही एवं मावे की मिठाइयों जैसे पदार्थों का अति सेवन करना, गहरी खाई अथवा ऊँचे जलप्रपात हों ऐसे स्थलों पर जाना, शरीर अत्यंत हिले-डुले ऐसे वाहनों में मुसाफिरी करना, हमेशा चित्त सोना-ये सब कार्य और व्यवहार गर्भ को नष्ट करने वाले हैं अतः गर्भिणी को इनसे बचना चाहिए।
जिनका गर्भ गिर जाता हो वे माताएँ गर्भरक्षक मंत्र (जो कि मंत्र की इच्छुक माताओं को ध्यान योग शिविर में दिया जाता है।) पढ़ते हुए एक काले धागे पर 21 गाँठे लगायें व 21 बार गर्भरक्षक मंत्र पढ़कर पेट पर बाँधें। इससे गर्भ की रक्षा होती है।
जो गर्भिणी स्त्री खुले प्रदेश में, एकांत में अथवा हाथ-पैर को खूब फैलाकर सोने के स्वभाव वाली हो अथवा रात्रि के समय में बाहर घूमने के स्वभाववाली हो तो वह स्त्री उन्मत्त-पागल संतान को जन्म देती है।
लड़ाई-झगड़े, हाथापाई एवं कलह करने के स्वभाववाली स्त्री अपस्मार या मिर्गी के रोगवाली संतान को जन्म देती है।
यदि गर्भावस्था में मैथुन का सेवन किया जाये तो खराब देहवाली, लज्जारहित, स्त्रीलंपट संतान उत्पन्न होती है। गर्भावस्था में शोक, क्रोध एवं दुष्ट कर्मों का त्याग करना चाहिए।




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